GST ई-इनवॉइसिंग: ई-इनवॉइस किसे जारी करना होगा, और क्या एक्सपोर्ट इनवॉइस पर भी चाहिए?
लेखक Ajaj Mohammad Qureshi · प्रकाशित · 7 मिनट में पढ़ें
कानूनी, टैक्स या निवेश सलाह नहीं।
GST में रजिस्टर्ड बिज़नेस को ई-इनवॉइस तब बनाना होता है जब 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में उसका एग्रीगेट टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा हो चुका हो (Notification 10/2023–Central Tax, 1 अगस्त 2023 से)। ई-इनवॉइसिंग में B2B इनवॉइस, क्रेडिट और डेबिट नोट और एक्सपोर्ट इनवॉइस आते हैं: हर एक को आप Invoice Registration Portal पर अपलोड करते हैं, जो एक IRN और साइन किया हुआ QR कोड लौटाता है। वैध IRN के बिना वह दस्तावेज़ वैध इनवॉइस नहीं है। ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस को 30 दिन के भीतर रिपोर्ट करना होता है।
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GST ई-इनवॉइसिंग क्या है?
ई-इनवॉइसिंग का मतलब यह नहीं कि सरकार आपके इनवॉइस बनाती है। आप उन्हें अब भी अपने बिलिंग या अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में ही बनाते हैं। बदलाव यह है कि इनवॉइस जारी करने से पहले आप उसका ब्योरा Form GST INV-01 के फ़ॉर्मैट में एक Invoice Registration Portal (IRP) को रिपोर्ट करते हैं। IRP उसे जाँचता है, एक यूनिक Invoice Reference Number (IRN) देता है, उस पर डिजिटल साइन करता है और उसे एक QR कोड के साथ लौटाता है, जिसे आप इनवॉइस पर छापते हैं। इसका क़ानूनी आधार CGST Rules का नियम 48(4) है, और नियम 48(5) इसे असरदार बनाता है: अधिसूचित व्यक्ति अगर किसी और तरीके से इनवॉइस जारी करे तो उसे "इनवॉइस नहीं माना जाएगा"।
ई-इनवॉइस कैसे बनता है
आपका बिलिंग सिस्टम
इनवॉइस INV-01 फ़ॉर्मैट में तैयार
Invoice Registration Portal
जाँचता और साइन करता है; IRN जारी करता है
साइन किया ई-इनवॉइस + QR कोड
JSON के रूप में आपको वापस
GST पोर्टल
ब्योरा GSTR-1 में चला जाता है
आपका क्लाइंट
QR कोड के साथ इनवॉइस पाता है
ई-इनवॉइस किसे जारी करना होगा? मौजूदा सीमा
किन बिज़नेस को ई-इनवॉइस बनाना है, यह Notification No. 13/2020–Central Tax तय करता है, जिसमें कई बार संशोधन हुआ है। ताज़ा संशोधन, 10 मई 2023 के Notification No. 10/2023–Central Tax ने 1 अगस्त 2023 से एग्रीगेट टर्नओवर की सीमा ₹10 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दी। अक्टूबर 2026 में भी GSTN ₹5 करोड़ को "ई-इनवॉइसिंग की मौजूदा पात्रता सीमा" बता रहा था।
यह जाँच पीछे देखती है। सेल्फ़-इनेबलमेंट पर GSTN की एडवाइज़री बताती है कि अगर किसी वित्त वर्ष में आपका टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा रहा, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से आपको ई-इनवॉइस बनाना है, और यही बात तब भी लागू है जब आपने यह आँकड़ा पहले के किसी भी वित्त वर्ष में पार किया हो। टर्नओवर एक PAN के तहत एग्रीगेट टर्नओवर है, इसलिए ज़ीरो-रेटेड एक्सपोर्ट भी गिने जाते हैं।
ई-इनवॉइसिंग की सीमा कैसे घटी
सितंबर 2019
मंज़ूरी
GST काउंसिल की 37वीं बैठक ने चरणों में ई-इनवॉइसिंग को मंज़ूरी दी।
जुलाई 2020
सिस्टम चालू
NIC का ई-इनवॉइस सिस्टम टर्नओवर के आधार पर अधिसूचित करदाताओं के लिए चालू (Notification 61/2020-CT)।
अगस्त 2022
₹10 करोड़
Notification 17/2022-CT द्वारा Notification 13/2020-CT में संशोधन के बाद सीमा ₹10 करोड़।
1 अगस्त 2023
₹5 करोड़
Notification 10/2023-CT ने इसे ₹5 करोड़ किया, जहाँ यह अक्टूबर 2026 तक है।
सितंबर 2023
30 दिन की सीमा
₹100 करोड़ और उससे ज़्यादा AATO पर 30 दिन की रिपोर्टिंग सीमा लागू।
1 अप्रैल 2025
30 दिन की सीमा का दायरा बढ़ा
अब यह सीमा ₹10 करोड़ और उससे ज़्यादा AATO पर लागू है।
क्या एक्सपोर्ट इनवॉइस पर ई-इनवॉइस चाहिए?
हाँ, अगर आप सीमा से ऊपर हैं। NIC के सिस्टम विवरण के अनुसार IRN इनवॉइस, डेबिट नोट और क्रेडिट नोट के लिए "B2B और एक्सपोर्ट लेन-देन के लिए" बनते हैं। विदेश में आपके क्लाइंट के पास GSTIN न होने से इनवॉइस दायरे से बाहर नहीं होता। आप एक्सपोर्ट इनवॉइस को बाक़ी इनवॉइस की तरह IRP को रिपोर्ट करते हैं, उसे IGST के भुगतान के साथ या बिना एक्सपोर्ट के रूप में मार्क करते हैं, और भेजे जाने वाले इनवॉइस पर QR कोड छापते हैं। नियम 46 के तहत एक्सपोर्ट इनवॉइस पर ज़रूरी एंडोर्समेंट और आपके LUT का संदर्भ अब भी दस्तावेज़ पर जाते हैं; देखें सर्विसेज़ के एक्सपोर्ट पर GST।
| दस्तावेज़ | ई-इनवॉइस चाहिए? (अगर आप सीमा से ऊपर हैं) |
|---|---|
| GST में रजिस्टर्ड भारतीय बिज़नेस को टैक्स इनवॉइस (B2B) | हाँ |
| एक्सपोर्ट इनवॉइस, LUT के तहत या IGST के भुगतान पर | हाँ |
| B2B या एक्सपोर्ट इनवॉइस पर क्रेडिट नोट और डेबिट नोट | हाँ |
| भारत में अनरजिस्टर्ड उपभोक्ता को इनवॉइस (B2C) | इस योजना के तहत IRN नहीं |
| विदेश से इंपोर्ट की गई सर्विसेज़ पर रिवर्स चार्ज के तहत सेल्फ़-इनवॉइस | ₹5 करोड़+ के लिए काउंसिल की 57वीं बैठक की सिफ़ारिश; अभी लागू नहीं |
ई-इनवॉइसिंग से किसे छूट है?
ई-इनवॉइसिंग शुरू होने पर जिन वर्गों को छूट मिली, NIC की सूची के अनुसार वे हैं:
- Special Economic Zone की यूनिटें (SEZ यूनिट को बेचने वाला सप्लायर फिर भी ई-इनवॉइस बनाता है)।
- बीमा कंपनियाँ, बैंकिंग कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान, NBFC समेत।
- सड़क से माल ढोने वाली गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियाँ।
- यात्री परिवहन सर्विस देने वाले सप्लायर।
- मल्टीप्लेक्स स्क्रीन पर सिनेमा प्रदर्शन में प्रवेश देने वाले सप्लायर।
तब से छूटों में संशोधन हुए हैं, इसलिए अगर आपका बिज़नेस इनमें से किसी श्रेणी के आसपास है तो Notification 13/2020–Central Tax का मौजूदा पाठ देखें। GSTN हर महीने उन GSTIN की सूची भी प्रकाशित करता है जिन्होंने छूट घोषित की है।
यह भी पढ़ेंक्या सर्विस एक्सपोर्ट पर GST लगता है?रिपोर्टिंग की 30 दिन की समय-सीमा क्या है?
1 अप्रैल 2025 से, जिस बिज़नेस का एग्रीगेट सालाना टर्नओवर ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा है, वह किसी ई-इनवॉइस को उसकी तारीख से 30 दिन बाद IRP पर रिपोर्ट नहीं कर सकता। GSTN का उदाहरण: 1 अप्रैल 2025 की तारीख वाला इनवॉइस 30 अप्रैल 2025 के बाद रिपोर्ट नहीं हो सकता, और IRP उसे रोक देता है। यह सीमा इनवॉइस, क्रेडिट नोट और डेबिट नोट पर लागू है। पहले यह, सितंबर 2023 की एक एडवाइज़री के तहत, ₹100 करोड़ या उससे ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस पर लागू हुई थी; GSTN की एडवाइज़री के अनुसार ₹10 करोड़ से कम पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।
एक्सपोर्टर के लिए असल जोखिम वह इनवॉइस है जो अकाउंटिंग सिस्टम में बनाकर भुला दिया गया। इनवॉइस जारी होने से पहले IRN का होना ज़रूरी है, इसलिए महीने के आख़िर में एक साथ करने के बजाय IRP वाला कदम इनवॉइसिंग की प्रक्रिया में ही जोड़ दें।
QR कोड में क्या होता है, और क्या ई-इनवॉइस कैंसिल हो सकता है?
IRP एक QR कोड बनाता है जिसमें IRN (एक हैश) और इनवॉइस का मुख्य ब्योरा उसके डिजिटल सिग्नेचर के साथ होता है, ताकि उसे GSTN के वेरिफ़िकेशन ऐप से ऑफ़लाइन जाँचा जा सके या पोर्टल पर चेक किया जा सके। सिस्टम द्वारा दिए गए समय के भीतर आप IRN कैंसिल कर सकते हैं, बशर्ते उससे कोई सक्रिय ई-वे बिल जुड़ा न हो; कैंसिल किए गए इनवॉइस नंबर का दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकता। IRP पर ई-इनवॉइस में संशोधन नहीं हो सकता: संशोधन GSTR-1 फ़ाइल करते समय GST पोर्टल पर होते हैं।
ई-इनवॉइसिंग कैसे शुरू करें?
- अपना स्टेटस जाँचें: किसी IRP पर "e-Invoice Status of Taxpayer" में अपना GSTIN खोजें। अगर आप ₹5 करोड़ पार कर चुके हैं लेकिन इनेबल नहीं हैं, तो ई-इनवॉइस पोर्टल पर सेल्फ़-इनेबलमेंट विकल्प इस्तेमाल करें।
- तय करें कि रिपोर्ट कैसे करेंगे: कम संख्या के लिए IRP का वेब फ़ॉर्म या ऑफ़लाइन टूल, या अपने ERP या किसी GST Suvidha Provider के ज़रिए API इंटीग्रेशन। छह IRP अधिकृत हैं; आप इनमें से कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- अपने इनवॉइस के फ़ील्ड को INV-01 स्कीमा से मिलाएँ, जिसमें HSN या SAC कोड (टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा हो तो छह अंक) और एक्सपोर्ट सप्लाई टाइप शामिल हैं।
- अगर API से इंटीग्रेट कर रहे हैं तो लाइव जाने से पहले सैंडबॉक्स में टेस्ट करें।
- हर इनवॉइस जारी करने से पहले IRN बनाएँ, और उस पर QR कोड छापें।
आगे क्या बदलाव आ रहे हैं?
GST काउंसिल की 8 अक्टूबर 2026 की 57वीं बैठक ने सिफ़ारिश की कि ₹5 करोड़ या उससे ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस के लिए ई-इनवॉइसिंग उन सेल्फ़-इनवॉइस पर भी लागू हो जो अनरजिस्टर्ड व्यक्तियों से सप्लाई और सर्विसेज़ के इंपोर्ट पर रिवर्स चार्ज के तहत बनते हैं। GSTN ने IRP सैंडबॉक्स में दो सप्लाई टाइप, RCMDOM और RCMIMP, जोड़ दिए हैं और कहा है कि प्रोडक्शन की तारीख बाद में घोषित होगी। अगर आप विदेशी वेंडर को सॉफ़्टवेयर या सर्विसेज़ के लिए भुगतान करते हैं, तो इसका मतलब होगा कि आपके रिवर्स-चार्ज सेल्फ़-इनवॉइस पर भी IRN चाहिए। ज़्यादा जानकारी सर्विस एक्सपोर्टर के लिए GST बदलाव में।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
GST ई-इनवॉइसिंग की टर्नओवर सीमा क्या है?
2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ का एग्रीगेट टर्नओवर, 1 अगस्त 2023 से Notification 10/2023–Central Tax के तहत। एक बार पार करने पर अगले वित्त वर्ष से ई-इनवॉइस बनाना होता है।
क्या एक्सपोर्ट इनवॉइस के लिए ई-इनवॉइसिंग ज़रूरी है?
हाँ, सीमा से ऊपर के बिज़नेस के लिए। ई-इनवॉइस सिस्टम B2B और एक्सपोर्ट इनवॉइस, डेबिट नोट और क्रेडिट नोट कवर करता है। एक्सपोर्ट इनवॉइस को IRP पर रिपोर्ट करें और उस पर QR कोड छापें।
ई-इनवॉइस रिपोर्ट करने की समय-सीमा क्या है?
1 अप्रैल 2025 से, ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा एग्रीगेट टर्नओवर वाले बिज़नेस को इनवॉइस की तारीख से 30 दिन के भीतर रिपोर्ट करना होगा; उसके बाद IRP रिपोर्टिंग रोक देता है। GSTN के अनुसार ₹10 करोड़ से कम पर फ़िलहाल ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।
अगर मैं IRN के बिना इनवॉइस जारी करूँ तो क्या होगा?
अगर आपके लिए ई-इनवॉइस ज़रूरी है, तो CGST Rules का नियम 48(5) कहता है कि किसी और तरीके से जारी इनवॉइस को इनवॉइस नहीं माना जाता, जिससे आपके क्लाइंट का इनपुट टैक्स क्रेडिट और आपका अपना कंप्लायंस ख़तरे में पड़ सकता है।
स्रोत
इस लेख को 30 अक्टूबर 2026 को इन मूल स्रोतों से जाँचा गया।
- CGST Rules, 2017 — rule 48, manner of issuing invoice (rule 48(4) e-invoicing)
- CBIC — Notification No. 10/2023-Central Tax, 10 May 2023 (₹5 crore from 1 August 2023), via GST Council
- NIC — e-invoice/IRN system: detailed overview (scope, exemptions, QR code, cancellation)
- NIC — e-Invoice System process note (B2B and export transactions)
- GSTN — Time limit for reporting e-invoices on the IRP lowered to AATO ₹10 crore, 5 November 2024
- GSTN — Advisory: self-enablement for e-invoicing, 3 April 2024
- GSTN — e-invoicing for reverse-charge self-invoices (RCMDOM, RCMIMP), 16 October 2026
- PIB — Recommendations of the 57th Meeting of the GST Council, 8 October 2026
यह सामान्य जानकारी है, टैक्स, कानूनी या निवेश सलाह नहीं। नियम और प्रोडक्ट बदलते रहते हैं: अपने व्यवसाय के लिए विवरण अपने CA, बैंक या नियामक से पक्का करें।
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