क्या सर्विस एक्सपोर्ट पर GST लगता है?
लेखक Ajaj Mohammad Qureshi · प्रकाशित · 8 मिनट में पढ़ें
कानूनी, टैक्स या निवेश सलाह नहीं।
सर्विस एक्सपोर्ट पर कोई GST नहीं लगता: IGST Act की धारा 16 के तहत यह zero-rated supply है। आप Form GST RFD-11 में Letter of Undertaking (LUT) फ़ाइल करके बिना IGST के इनवॉइस बनाते हैं, या IGST भरकर उसे वापस क्लेम करते हैं। सप्लाई को धारा 2(6) की पाँच शर्तें पूरी करनी होती हैं — और 30 मार्च 2026 से विदेशी क्लाइंट को दी गई intermediary services भी इन्हें पूरा कर सकती हैं।
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इस पेज पर
- क्या सर्विस एक्सपोर्ट पर GST लगता है?
- सर्विस एक्सपोर्ट की पाँच शर्तें क्या हैं?
- Zero-rated बनाम exempt: फ़र्क़ क्या है?
- कैसे पता करें कि place of supply भारत के बाहर है?
- 2026 में intermediary services के लिए क्या बदला?
- LUT, या IGST भरकर refund क्लेम करें?
- LUT (Form GST RFD-11) कैसे फ़ाइल करें?
- एक्सपोर्ट इनवॉइस पर क्या लिखा जाता है?
- अगर पेमेंट कभी न आए तो?
- क्या मुझे GST रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत भी है?
- एक्सपोर्टर GST में सबसे ज़्यादा कौन-सी ग़लतियाँ करते हैं?
- कौन-से दस्तावेज़ zero-rated एक्सपोर्ट का आधार बनते हैं?
क्या सर्विस एक्सपोर्ट पर GST लगता है?
नहीं। सर्विस का एक्सपोर्ट IGST Act की धारा 16(1) के तहत zero-rated supply है। Zero-rated और exempt एक चीज़ नहीं हैं: आप विदेशी क्लाइंट से कोई टैक्स नहीं लेते, लेकिन सप्लाई के लिए ख़रीदी चीज़ों पर input tax credit आपके पास रहता है, और बचा हुआ credit refund के रूप में वापस मिल सकता है। शर्त यह है कि सप्लाई सच में एक्सपोर्ट हो, जैसा Act में परिभाषित है।
सर्विस एक्सपोर्ट की पाँच शर्तें क्या हैं?
| धारा 2(6) की शर्त | सबूत के तौर पर क्या रखें |
|---|---|
| सप्लायर भारत में स्थित है | आपका GST रजिस्ट्रेशन और कारोबार की जगह |
| पाने वाला भारत के बाहर स्थित है | क्लाइंट के विदेशी पते के साथ कॉन्ट्रैक्ट और इनवॉइस |
| Place of supply भारत के बाहर है | सर्विस का स्वरूप — नीचे place of supply देखें |
| पेमेंट convertible विदेशी मुद्रा में, या जहाँ RBI अनुमति दे वहाँ भारतीय रुपये में मिला है | हर पेमेंट की बैंक की remittance advice |
| सप्लायर और पाने वाला एक ही व्यक्ति की सिर्फ़ अलग-अलग शाखाएँ नहीं हैं | यह कि क्लाइंट एक अलग संस्था है, विदेश में आपकी अपनी ब्रांच या हेड ऑफ़िस नहीं |
Zero-rated बनाम exempt: फ़र्क़ क्या है?
Zero-rated, exempt नहीं है
| Zero-rated (एक्सपोर्ट) | Exempt supply | |
|---|---|---|
| ग्राहक से लिया गया GST | कोई नहीं (LUT के तहत), या IGST भरा और refund हुआ | कोई नहीं |
| आपके खर्चों पर input tax credit | मिलता है, भले सप्लाई वैसे exempt होती (s.16(2)) | नहीं मिलता |
| Refund | बचा हुआ input tax credit (LUT के तहत), या भरा हुआ IGST | कोई नहीं |
| इनवॉइस | एक्सपोर्ट endorsement वाला tax invoice | Bill of supply |
| Aggregate turnover में गिना जाता है | हाँ | हाँ |
असल में यह क्यों मायने रखता है: जो एजेंसी सॉफ़्टवेयर subscription, को-वर्किंग डेस्क और CA की फ़ीस पर GST भरती है, उसका input tax credit हर महीने जमा होता है। Exempt supply माना जाए तो वह credit चला जाएगा। LUT के तहत zero-rated एक्सपोर्ट के रूप में, उसे बचे हुए credit के refund के रूप में वापस क्लेम किया जा सकता है।
कैसे पता करें कि place of supply भारत के बाहर है?
ज़्यादातर सर्विस में place of supply वह जगह है जहाँ पाने वाला है (धारा 13(2)), इसलिए विदेशी क्लाइंट होने से यह भारत के बाहर हो जाता है। लेकिन धारा 13(3) से 13(13) कुछ ख़ास सर्विस के लिए अपने नियम तय करती हैं, और कुछ में क्लाइंट विदेश में होने पर भी place of supply भारत में हो सकता है — जैसे, उस माल पर सर्विस जो क्लाइंट भारत में आपको भौतिक रूप से उपलब्ध कराता है, भारत में अचल संपत्ति से जुड़ी सर्विस, या भारत में होने वाले इवेंट। अगर आपका काम इनमें से किसी को छूता है, तो LUT के तहत इनवॉइस बनाने से पहले अपने CA से जाँच लें।
2026 में intermediary services के लिए क्या बदला?
29 मार्च 2026 तक, धारा 13(8)(b) intermediary services — दो अन्य पक्षों के बीच सप्लाई का इंतज़ाम करने वाले ब्रोकर और एजेंट — का place of supply सप्लायर की जगह मानती थी, यानी विदेशी क्लाइंट के लिए काम करने वाला भारतीय intermediary एक्सपोर्टर नहीं गिना जा सकता था। Finance Act, 2026 की धारा 157 ने यह खंड 30 मार्च 2026 से हटा दिया। अब intermediary services सामान्य नियम पर चलती हैं, इसलिए विदेश में किसी को दी गई ऐसी सर्विस, बाकी शर्तें पूरी होने पर, zero-rated एक्सपोर्ट हो सकती है। 30 मार्च 2026 से पहले के इनवॉइस के लिए, अपने CA से पूछें कि पुराना नियम कैसे लागू होता है।
LUT, या IGST भरकर refund क्लेम करें?
- LUT के तहत: बिना IGST के इनवॉइस बनाएँ, और अगर बचा हुआ input tax credit जमा हो तो उसका refund क्लेम करें। कोई नकदी टैक्स में नहीं फँसती। ज़्यादातर सर्विस एक्सपोर्टर यही करते हैं।
- IGST भरकर: एक्सपोर्ट पर IGST लगाएँ और भरें, फिर वह IGST refund के रूप में वापस क्लेम करें। Refund आने तक नकदी फँसी रहती है।
सोचिए दो लोगों का एक स्टूडियो जो हर महीने एक विदेशी क्लाइंट को इनवॉइस भेजता है। LUT के तहत हर इनवॉइस पूरी फ़ीस पर बिना IGST के जाता है, और उस पर सरकार को कुछ नहीं भरना पड़ता। LUT के बिना, स्टूडियो हर महीने के एक्सपोर्ट पर अपनी जेब से IGST भरता है और हर refund प्रोसेस होने का इंतज़ार करता है — साल में बारह refund ट्रैक करने पड़ते हैं, उस पैसे के लिए जो असल में कभी बकाया था ही नहीं। इसीलिए योग्य सर्विस एक्सपोर्टर के लिए LUT ही सामान्य रास्ता है।
यह भी पढ़ें2026 में एक्सपोर्ट realisation अवधि: यह फिर से 9 महीने क्यों हैLUT (Form GST RFD-11) कैसे फ़ाइल करें?
GST पोर्टल पर LUT फ़ाइल करना
- 1
फ़ॉर्म खोलें
लॉग-इन करें और Services > User Services > Furnish Letter of Undertaking (LUT) पर जाएँ।
- 2
Financial year चुनें
एक LUT एक financial year के लिए होता है — हर साल नया फ़ाइल करें, बेहतर हो पहले एक्सपोर्ट इनवॉइस से पहले।
- 3
दो गवाह जोड़ें
दो स्वतंत्र गवाहों का नाम, पता और पेशा।
- 4
घोषणा करें और preview देखें
Self-declarations पर टिक करें, फिर फ़ॉर्म का preview देखें।
- 5
साइन करके फ़ाइल करें
DSC या EVC से। पोर्टल एक ARN और acknowledgement बनाता है।
- 6
ट्रैक करें
View My Submitted LUTs में। अगर अधिकारी 3 कार्य-दिवस में कुछ नहीं करता, तो यह deemed approved दिखता है।
CBIC के Circular 8/8/2017-GST ने LUT की सुविधा सभी रजिस्टर्ड व्यक्तियों को दी, सिवाय उनके जिन पर उसमें बताए अपराधों के लिए मुकदमा चला हो। LUT के बिना, आप पहले IGST भरते हैं और refund का इंतज़ार करते हैं।
एक्सपोर्ट इनवॉइस पर क्या लिखा जाता है?
- नियम 46 के मुताबिक़ ज़रूरी endorsement: "SUPPLY MEANT FOR EXPORT UNDER BOND OR LETTER OF UNDERTAKING WITHOUT PAYMENT OF INTEGRATED TAX" (या IGST भरते हों तो "SUPPLY MEANT FOR EXPORT ON PAYMENT OF INTEGRATED TAX")।
- उस financial year का आपका LUT रेफ़रेंस (ARN)।
- क्लाइंट का नाम और विदेशी पता, SAC, और इनवॉइस की करेंसी में वैल्यू।
- Purpose code और पेमेंट के निर्देश।
अगर पेमेंट कभी न आए तो?
LUT एक वादा है। सर्विस के लिए, नियम 96A इनवॉइस के एक साल के अंदर, या RBI की किसी भी छूट समेत FEMA की दी अवधि के अंदर, जो भी बाद में हो, पेमेंट की उम्मीद करता है। अगर पेमेंट नहीं आता, तो उसके बाद 15 दिन के अंदर आप ब्याज के साथ IGST भरते हैं। FEMA की अपनी 9 महीने की realisation अवधि है — दोनों को इनवॉइस की तारीख़ से ट्रैक करें।
क्या मुझे GST रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत भी है?
एक financial year में आपका aggregate turnover ₹20 लाख (special category राज्यों में ₹10 लाख) पार करते ही रजिस्टर करना ज़रूरी है, और एक्सपोर्ट का turnover उस आँकड़े में गिना जाता है। एक्सपोर्ट inter-State supply हैं, लेकिन Notification 10/2017–Integrated Tax, inter-State सर्विस देने वालों को सीमा के अंदर रहने तक अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से छूट देता है। इसलिए सिर्फ़ विदेशी क्लाइंट वाले छोटे फ्रीलांसर को सिर्फ़ इसलिए रजिस्टर करने की ज़रूरत नहीं कि क्लाइंट विदेश में हैं। रजिस्ट्रेशन के साथ LUT और refund का रास्ता भी आता है — समय अपने CA से तय करें।
एक्सपोर्टर GST में सबसे ज़्यादा कौन-सी ग़लतियाँ करते हैं?
- नए financial year का LUT फ़ाइल होने से पहले इनवॉइस बनाना। अप्रैल का पहला इनवॉइस ही सबसे ज़्यादा फँसता है।
- इनवॉइस पर endorsement न लिखना। नियम 46 उस पर एक्सपोर्ट वाले शब्द चाहता है; उनके बिना इनवॉइस एक सामान्य सप्लाई जैसा पढ़ा जाता है।
- यह मान लेना कि हर विदेशी क्लाइंट मतलब एक्सपोर्ट। Place of supply भी भारत के बाहर होना चाहिए — धारा 13(3) से 13(13) के ख़ास नियम जाँचें।
- विदेश में अपनी ही ब्रांच को बिल करना। एक ही व्यक्ति की शाखाओं के बीच सप्लाई पाँचवीं शर्त पर फ़ेल होती है।
- बकाया इनवॉइस का हिसाब खो देना। LUT के तहत, नियम 96A की अवधि के बाद भी बकाया इनवॉइस IGST और ब्याज में बदल जाता है।
- रिटर्न में एक्सपोर्ट को exempt दिखाना, और इस तरह वह input tax credit क्लेम न करना जो zero-rating देता है।
कौन-से दस्तावेज़ zero-rated एक्सपोर्ट का आधार बनते हैं?
हर remittance advice आपके रिटर्न में zero-rated turnover और किसी भी refund क्लेम का आधार है, साथ में कॉन्ट्रैक्ट (जो दिखाए कि क्लाइंट विदेश में और एक अलग संस्था है), endorsement वाला इनवॉइस और उस साल के LUT की acknowledgement। इन्हें उसी इनवॉइस के साथ रखें जिससे ये जुड़े हैं। पेमेंट आप तक कैसे पहुँचता है, इसके लिए देखें भारत में विदेशी पेमेंट लेने की पूरी गाइड या एक्सपोर्ट पेमेंट कैसे काम करते हैं।
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- पर्पज़ कोड इनवॉइस बनाते समय ही जाँचा जाता है, बाद में बैंक पर पता नहीं चलता।
- कोई सेटअप फ़ीस नहीं और कोई मासिक फ़ीस नहीं; वेरिफ़िकेशन आमतौर पर एक कामकाजी दिन में हो जाता है।
कोई सेटअप फ़ीस नहीं · कोई मासिक फ़ीस नहीं · वेरिफ़िकेशन आमतौर पर एक कामकाजी दिन में
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत से सर्विस एक्सपोर्ट पर GST लगता है?
नहीं। सर्विस का एक्सपोर्ट IGST Act की धारा 16 के तहत zero-rated supply है। आप LUT के तहत बिना IGST के इनवॉइस बनाते हैं, या IGST भरकर refund क्लेम करते हैं, और दोनों ही तरह input tax credit आपके पास रहता है।
क्या LUT एक साल से ज़्यादा के लिए वैध है?
नहीं। Form GST RFD-11 में LUT एक financial year के लिए फ़ाइल होता है, इसलिए हर साल नया फ़ाइल करें, बेहतर हो उस साल के पहले एक्सपोर्ट इनवॉइस से पहले।
क्या विदेशी क्लाइंट को दी गई intermediary services अब एक्सपोर्ट हैं?
हो सकती हैं। IGST Act की धारा 13(8)(b), जो उनका place of supply भारत में रखती थी, 30 मार्च 2026 से हटा दी गई। विदेश में किसी को दी गई intermediary service अब सामान्य नियम पर चलती है और एक्सपोर्ट की पाँचों शर्तें पूरी होने पर zero-rated हो सकती है।
क्या सर्विस एक्सपोर्ट के लिए GST रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?
सीमा से नीचे नहीं: ज़्यादातर राज्यों में ₹20 लाख aggregate turnover, special category राज्यों में ₹10 लाख, एक्सपोर्ट भी turnover में गिना जाता है। उस सीमा से नीचे के inter-State सर्विस सप्लायर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से छूट पाते हैं।
अगर क्लाइंट एक साल के अंदर पेमेंट न करे तो क्या होता है?
LUT के तहत, नियम 96A के अनुसार आपको इनवॉइस से एक साल के बाद, या किसी भी extension समेत FEMA realisation अवधि के बाद, जो भी बाद में हो, 15 दिन के अंदर ब्याज के साथ IGST भरना होता है।
स्रोत
इस लेख को 30 अक्टूबर 2026 को इन मूल स्रोतों से जाँचा गया।
- IGST Act, 2017 — section 2(6), meaning of “export of services” (CBIC tax information portal)
- IGST Act, 2017 — section 16, zero rated supply (CBIC tax information portal)
- IGST Act, 2017 — section 13, place of supply where supplier or recipient is outside India; clause (8)(b) omitted by section 157 of the Finance Act, 2026 w.e.f. 30 March 2026 (CBIC tax information portal)
- CGST Rules, 2017 — rule 96A, export under bond or Letter of Undertaking (CBIC tax information portal)
- CGST Rules, 2017 — rule 46, tax invoice (export endorsement)
- CBIC — Circular No. 8/8/2017-GST, export under bond or LUT
- GST portal user guide — Furnishing of Letter of Undertaking (LUT) for export of goods or services
- CGST Act, 2017 — section 22, persons liable for registration
- CBIC — Notification No. 10/2017-Integrated Tax, exemption from registration for inter-State suppliers of services
यह सामान्य जानकारी है, टैक्स, कानूनी या निवेश सलाह नहीं। नियम और प्रोडक्ट बदलते रहते हैं: अपने व्यवसाय के लिए विवरण अपने CA, बैंक या नियामक से पक्का करें।
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